डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में एलन मस्क कैसे हुए पावरफुल?
नई दिल्ली:
“यहां जितने काम करने वाले हैं,वो सब कामचोर हैं.”
“जवाब दो या नौकरी से निकाल दिए जाओगे.”
“तूमने पिछले हफ्ते किया क्या था?”
ऊपर की ये तीन बातें शादी में आए फूफा भी बोल सकते हैं और अमेरिका में बिलेनियर एलन मस्क भी बोल रहे हैं. हर भारतीय घर में एक फूफा जी होते हैं न. वैसे तो आम दिनों में भी उनकी खूब चलती है,लेकिन शादी के सीजन में उनकी पावर और बढ़ जाती है. दूल्हे के पापा से भी ज्यादा. आजकल अमेरिका में एलन मस्क का रसूख भी ऐसे ही किसी फूफा जी जैसा हो रखा है. उनकी दूल्हे (अमेरिका) के पापा (राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) जितनी चलती दिख रही है. कम से कम ऑप्टिक्स तो ऐसा ही सेट हो गया है.
सबसे पहला सवाल कि ऐसा क्यों कहा जा रहा है? क्या यह नैरेटिव वाकई सच है या सिर्फ ऐसा दिख रहा है? डोनाल्ड ट्रंप की कमबैक वाली सरकार में ये ‘फूफा जी' कितने पावरफुल हैं? क्या इस ऑप्टिक्स का कोई पॉलिटिकल खामियाजा ट्रंप को भुगतना पड़ सकता है?
सवालों की फेहरिस्त लंबी है. चलिए शुरुआत डोनाल्ड ट्रंप की नई सरकार में एलन मस्क के पावर से करते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने एलन मस्क को अमेरिका की फेडरल सरकार (इसे केंद्र सरकार कह सकते हैं) में काम करने वाले तमाम कर्मचारियों में से अक्षम कर्मचारियों और सभी तरह की फिजूलखर्ची को जड़ से खत्म करने का एक बड़ा काम सौंपा दिया. उन्हें डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी यानी DOGE का इंचार्ज बना दिया. खास बात है कि खुद व्हाइट हाउस का कहना है कि मस्क DOGE के आधिकारिक कर्मचारी नहीं हैं और उनके पास "सरकारी निर्णय लेने का कोई औपचारिक अधिकार नहीं है." लेकिन हो इसके ठीक उल्ट रहा है. मस्क फैसले ले रहे हैं और ट्रंप उनको भरपूर सपोर्ट दे रहे हैं.
एलन मस्क ने मोर्चा संभाल लिया है और एक के बाद एक ऐसे फैसले,ऐसे आदेश पारित कर रहे हैं कि अमेरिकी सरकार के सभी कर्मचारी सकते में आ गए हैं. इधर एलन मस्क की आलोचना हो रही और उधर ट्रंप उनके कंधे पर हाथ रखकर बोल रहे हैं कि मस्क "बहुत अच्छा काम" कर रहे हैं. उन्हें "और अधिक आक्रामक" होते देखना चाहता है.इतना ही नहीं व्हाइट हाउस ने कहा है कि एलन मस्क इस सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप की पहली कैबिनेट बैठक में भाग लेंगे. याद रखिए यह तब हो रहा है जब खुद व्हाइट हाउस के मुताबिक आधिकारिक तौर पर एलन मस्क के पास ऐसी किसी कैबिनेट बैठक में शामिल होने का अधिकार नहीं है.
अमेरिका के कई डिपोर्टमेंट/ एजेंसी ने अपने कर्मचारियों से कहा कि वो इस इमेल का जवाब न दें. यहां तक की व्हाइट हाउस ने कहा कि एजेंसी के लीडर यह तय कर सकते हैं कि क्या कर्मचारियों के लिए DOGE के उस ईमेल का जवाब देना आवश्यक है या नहीं. लेकिन इन सबके बीच एक चीज खास थी कि ट्रंप का सपोर्ट लगातार एलन मस्क के साथ बना हुआ है. ट्रंप ने ओवल ऑफिस के पत्रकारों से बातचीत में ईमेल योजना का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें "यह बहुत अच्छा लगा."एलन मस्क DOGE को लीड कर रहे हैं और उधर सरकारी विभागों में एक के बाद एक कर्मचारियों की छंटनी हो रही है. मस्क तो एक सम्मेलन में चेनसॉ लेकर भी स्टेज पर पहुंचें जो छंटनी का संकेत था. एपी की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार,21 फरवरी तक:
13 फरवरी को,वेटरन्स अफेयर्स विभाग ने 1,000 से अधिक कर्मचारियों को निकालने की घोषणा की.रक्षा विभाग ने कहा कि वह अगले सप्ताह से प्रोबेशन पीरियड वाले 5,400 कर्मचारियों की छंटनी कर रहा है और आगे हायरिंग पर रोक लगाएगा.इंटरनर रेवेन्यू सर्विस में,प्रोबेशन पीरियड वाले 6,700 लोगों को निकाला जा रहा है.स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग में 5,000 से अधिक प्रोबेशन पीरियड वाले कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं.होमलैंड सिक्योरिटी विभाग में,प्रोबेशन पीरियड कर्मचारियों के रूप में पहचाने गए 405 लोगों को निकाला गया.
यह फेहरिस्त अभी और बड़ी है.
इस महीने की शुरुआत में,प्यू रिसर्च ने अपने सर्वे में पाया कि 54% अमेरिकियों का दृष्टिकोण मस्क के खिलाफ है. इनमें जिसमें 37% ने "बहुत प्रतिकूल" प्रतिक्रिया दी.
इस सप्ताह केवल 23% अमेरिकियों ने रॉयटर्स-इप्सोस सर्वे में बताया कि राष्ट्रपति को "राष्ट्रपति से असहमत किसी भी केंद्रीय कर्मचारी" को निकालने का अधिकार है.
हालांकि ट्रंप की पार्टी,रिपब्लिकल पार्टी से संबध रखने वाले लोगों को बहुत हद तक मस्क की यह कवायद रास आ रही है. प्यू डेटा के अनुसार,73% रिपब्लिकन या रिपब्लिकन की ओर झुकाव रखने वाले वोटर मस्क के पक्ष में हैं. वहीं डेमोक्रेट या डेमोक्रेटिक-झुकाव वाले वोटरों के लिए यह संख्या केवल 12% है.पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में मस्क ने यह बात स्वीकार किया कि सरकारी खर्च में कटौती करने की उत्सुकता में उनकी टीम से गलतियां हो सकती हैं. उन्होंने वादा किया कि "लेकिन हम किसी भी गलती को सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाएंगे."
लेकिन मस्क और ट्रंप की जोड़ी को संभलकर कदम रखना होगा. इतिहास ने बार-बार यह गवाही दी है कि अगर सरकार गलतियां ठीक कर भी देती हैं,तब भी अक्सर वोटर अगली बार वोट डालने जाते समय इन गलतियों को याद रखता है.